जिला हिन्दी साहित्य समिति के कवियों ने काव्यगोष्ठी के साथ खेले फूलों की होली
-होली की स्नेहिल धारा में कवियों ने रंगो से स्नान किया।
धमतरी(सशक्त हस्ताक्षर)। जिला हिन्दी साहित्य समिति द्वारा म्युनिसिपल स्कूल के पीछे साहित्य भवन धमतरी में होली मिलन समारोह का आयोजन कर आपसी प्रेम सद्भाव और भाईचारा का परिचय देते हुए उत्साह से मनाया।
इस समय रंग बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। नरेश चंद्र श्रोति ने कहा-होली प्रेम और भाईचारा फैलाती है यह देश में सद्भाव और खुशियां लाती है।
विनोद रणसिंह, शेष नारायण गजेन्द्र ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। तत्पश्चात् कवियों ने काव्य पाठ का खुशनुमा माहौल बनाया। कवि कुलदीप सिन्हा ने कहा- जीवन म कुछ पाना हे ते कुछ तो खोना पड़थे जान, जिहां जरूरत नई हे जिनला, फोकट के मत बांटव ज्ञान। राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा – आगे आगे हे संगी फागुन तिहार जुरमिल सबो मनाबो, ठेठरी, खुरमी, चौसेला, अरसा घलो बनाबो। आकाशगिरी गोस्वामी ने देश में अमन चैन लाने के लिए मैं होली खेलूंगा अभिनय के माध्यम से जनमानस को संदेश दिया। दीप शर्मा ने चंदन सा आदर, कुमकुम सी आस्था पुष्पों सा प्रेम सपनों की आशा कबीर रहीम, रसखान के दोहे मीरा बाई की भक्ति की अभिलाषा जीवन की सलाइयों से इन्हें बुना हूं साहित्य की फूलवारी से कुछ अरमान चुना हूं। श्रीमती कामिनी कौशिक-बधाई होली के लिए गा रही वसुंधरा शुभकामनाओं की थाल सजाए हर आत्मा की दुराव को प्राणमन से खींचकर दुलार दो सद्भावना जगा दिलों में रंगों में बुहार दो।
डॉ. सरिता दोशी-ऐ हवा, रूको याद करने दो मुझे कुछ भी मेरी बंकिम ग्रीवा पर तपन भरी वो छुअन कोई सुकोमल चेहरा गहराती हुई सांझ आम के कच्चे फूलों की गंध लहके हुए पीले फूलों वाले खेत रूको हवा याद करने दो मुझे। चन्द्रशेखर शर्मा-तुम छंदों का रंग लगाओ मैं गीतों की मल दूं होली, इंद्रधनुषी रंग उतरे आज बैठ दोहे की डोली, गीतिका में आए तो राधा खण्ड काव्य में कान्हा की टोली, अध्यक्ष जिला हिन्दी साहित्य समिति डुमन लाल ध्रुव-सात रंगो में रंग बरसे, इस होली के फाग में टेरता तन, नहाता मन धधकती आग में। सचिव डॉ. भूपेन्द्र सोनी ने काव्य पाठ के साथ कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में श्री आकाश गिरी गोस्वामी ने आभार व्यक्त किया।